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गुरुवार, 4 मई 2023

मार्कशीट्स का पेपर-प्रिंटिंग खराब, विद्यार्थी परेशान

 


मार्कशीट्स का पेपर-प्रिंटिंग खराब, विद्यार्थी परेशान

सीकर. पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय सीकर की ओर से सत्र 2021-22 की अंकतालिकाएं हल्के कागज पर छपवाई की वजह से खासी चर्चा में है। यूनिवर्सिटी ने जिस फर्म को रिजल्ट व मार्कशीट्स तैयार करने का टेंडर जारी किया था वह लगातार सवालों के घेरे में है।


विद्यार्थियों का आरोप है कि अंकतालिका का पेपर बहुत हल्का है, साथ ही प्रिंटिंग भी बहुत ज्यादा खराब है। ऐसे में यह अंकतालिकाएं लंबे समय तक सुरक्षित रखना बहुत मुश्किल काम है। छात्र संगठन एबीवीपी और एसएफआई भी इसको लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कई तरह के आरोप लगाने के साथ ही धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। बावजूद इसके यूनिवर्सिटी प्रशासन न इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है और ना ही संबंधित फर्म के खिलाफ कोई आवश्यक कार्रवाई की है।


यही नहीं यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार संबंधित फर्म को रिजल्ट निकालने के मात्र तीन दिन में अंकतालिकाएं संबंधित कॉलेजों और विश्वविद्यालय को भेजनी होती है लेकिन संबंधित फर्म ने दो माह तक भी अंकतालिकाएं नहीं भेजी। ऐसे में स्टूडेंट्स को नुकसान हुआ। छात्र-छात्राएं अपन कॉलेज व सेंटर पर मार्कशीट्स के लिए चक्कर लगाते रहे लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ा था।इसी कारण सैकड़ों स्टूडेंट्स अब कॉलेजों से अंकतालिकाएं नहीं ले जा रहे हैं। कई छात्र मार्कशीट के बिना अपने कार्य नहीं करवा पाए। इस पर भी यूनिवर्सिटी प्रशासन मौन रहा। जिसका खामियाजान विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा।


बड़ा सवाल: दो से ढाई हजार लिए फिर भी हल्का कागज

शेखावाटी विश्वविद्यालय की ओर से यूजी-पीजी व अन्य कोर्सेज में प्राइवेट स्टूडेंट्स से दो हजार रुपए से लेकर ढाई हजार रुपए तक लिए जाते हैं। वहीं रेगुलर स्टूडेंट्स से 1100 रुपए से लेकर 2900 रुपए तक लिए जा रहे हैं। ये रुपए एग्जाम आयोजित करवाने, कॉपियां जांचने, परिवहन सहित अन्य मदों के लिए लिए जाते हैं। ऐसे में बहुत हल्के कागज पर खराब प्रिंटिंग की अंकतालिकाएं प्रिंट कर देना स्टूडेंट्स के साथ सीधा धोखा है। यही नहीं यह परिपाटी चलने के कारण अब अगले सत्र में भी जिस भी फर्म को अंकतालिकाएं तैयार करने का टेंडर जारी किया जाएगा, वे भी इसी प्रकार से हल्के कागज पर मार्कशीट्स तैयार करके देंगे।


फर्म पर कठोर कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाए

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मार्कशीट्स काफी हल्के कागज पर निकाली है। इसके साथ ही प्रिंटिंग भी बेहद घटिया है। ऐसे में यूनिवर्सिटी को संबंधित फर्म पर कठोर कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना लगाना चाहिए। इसके साथ ही हम फीस वृद्धि, परीक्षा की कॉपियां, परीक्षा के पेपरों की छपाई, विद्यार्थियों के रिजल्ट में लगातार छेड़छाड़ का सवाल हो। हम सभी मुद्दों को लेकर बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन से लड़े हैं। विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार का आलम फैला हुआ है। आने वाले समय में छात्र शक्ति को एकजुट करके मजबूत आंदोलन का निर्माण करके यूनिवर्सिटी प्रशासन के मंसूबों पर पानी फेरेंगे।-विजेंद्र ढाका, छात्रसंघ अध्यक्ष शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर


टेंडर की शर्तों के अनुसार अंकतालिकाएं तैयार की

फर्म ने टेंडर की शर्तों के अनुसार अंकतालिकाएं तैयार की है। पहले अजमेर की फर्म का एकाधिकार था, उसने पिछले बार टेंडर ही नहीं लगाया था जिसके चलते दिल्ली की एक फर्म को टेंडर मिला। पुरानी फर्म ने नई फर्म को पुराना डेटा नहीं दिया। वहीं कोविड के चलते दो स्टूडेंट्स को प्रमोट भी किया गया था, ऐसे में उनकी अंकतालिका दो साल के रिजल्ट का एवरेज निकाल कर बनाई गई थी, इस कारण फर्म को मार्कशीट्स तैयार करने में समय लग गया। अगली बार से कोविड इंपैक्ट समाप्त करने का प्रयास करेंगे।-प्रो. भगीरथसिंह बिजारणियां, कुलपति शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर

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